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SD07, ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं।

 ध्यान योग या ध्यान की बातें

     प्रभु प्रेमयों ! ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी है- अंदर में चलना । अंदर में कैसे चला जाता है, इसकी जानकारी सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के प्रवचन से लिया गया है। उसके  कुछ अंश यहां प्रस्तुत किया जाता है जो ता.२४/४/१९६६ ई. का है।  
ध्यान योग में सफलता के लिए गुरु महाराज बताते हैं कि सबसे पहले व्यक्ति को संस्कारी होना चाहिए । ध्यानाभ्यास करने का संस्कार । जिसके शरीर पर, मन पर, बुद्धि पर ध्यान करने का या ध्यान योग करने का संस्कार पड़ा हो, तो वह ध्यान योग में जल्दी सफल हो जाता है। संस्कार किसे कहते हैं?  संस्कारी कौन है ? किस तरह का संस्कारी है, यह बात भी नीचे के उदाहरण से स्पष्ट होगा । 


SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। ध्यान योग में संस्कार की चर्चा।
ध्यान योग में संस्कार की चर्चा।


ध्यान योग में सफलता के लिए संस्कार


   जो संस्कार इस जन्म में नहीं हुआ । उसके व्युत्क्रम देखे जाते हैं। हमारे मन में बहुत प्रकार के संस्कार भरे हैं, इसीलिए हमारे बहुत जन्म हुए। हमारे अंदर जितने संस्कार उदित हुए वह सब संस्कार सुख के लिए ही। सुख की खोज में पड़े, उसी के अंदर दौड़े। जो ज्ञानवान हैं। उनके अंदर में ज्ञान का उदय होता रहता है। यह ज्ञान का संस्कार पहले से ही है। कहा जाता है कि इस ज्ञान के पक्ष में बहुत जन्मों से रहे। शंकराचार्य, भगवान बुद्ध बड़े-बड़े महात्मा हुए हैं। कबीर साहब, गुरु नानक साहब यह सब ऐसे हुए कि बचपन से ही ज्ञान के पक्ष में चले इसलिए कहना पड़ता है कि कई जन्मों से इनके अंदर ज्ञान चला आता था। जो इस जन्म में उदित हुआ।

SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। सद्गुरु महर्षि मेंही
सद्गुरु महर्षि मेंही

  साधारणता संस्कार उसे कहते हैं जो भाव या विचार मन में बार-बार उत्पन्न होता है, स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है। वह जन्म-जन्मांतर का संस्कार होता है। प्रमाण के लिए नीचे के उद्धरण को पढ़ें। 
सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के वचन


SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। सत्संग में बैठे हुए गुरुदेव
सत्संग में बैठे हुए गुरुदेव

"प्यारे लोगों!
     पूर्व की बात हम लोगों को स्मरण नहीं है; परंतु सद् ग्रंथों से विदित होता है कि हमारे बहुत से जन्म हुए हैं ।कितने जन्म हुए, यह संख्या में बतलाने योग्य नहीं है ; किसी भी संख्या- करोड़, अरब में बताने योग्य नहीं है; क्योंकि यह पृथ्वी, यह सूर्य, यह चंद्र- सब बहुत पुराने हैं।इनकी रचना कब हुई, कोई ठीक-ठीक बता नहीं सकता। आज के लोग कुछ बताते हैं; लेकिन यह निश्चित नहीं है।

SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। अंदर प्रवेश की मुद्रा
अंदर प्रवेश की मुद्रा

      हमलोग चार युगों की बात सुनते हैं। चार युग एक बार समाप्त होने पर एक चौकड़ी होती है। फिर कल्प और महाकल्प होते हैं। यह पुराणों के अनुकूल है। सृष्टि हुई है, लेकिन कब हुई है, कोई बता नहीं सकता। जब से सृष्टि है, तब से जीव जंतु हैं।

     हम लोगों के भी कितने जन्म हुए ठिकाना नहीं अंदाज से करके Andaaz करके मालूम होता है कि हमारे बहुत जीवन गुजरे हैं । क्योंकि हमारे मन में बहुत संस्कार हैं। इस जन्म में कितने प्रकार के संस्कार में हम रहते हैं। यह भी अंदाज़ से बाहर है। फिर भी भिन्न-भिन्न लोग भिन्न भिन्न संस्कार के देखे जाते हैं। जब लोग कुछ सयाने होते हैं और उनके संस्कार उदित होते हैं। तो इसी जन्म में के सभी संस्कार हैं, कहा नहीं जाता।

SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। ध्यानाभ्यास के बाद प्रसन्न मुद्रा में
ध्यानाभ्यास के बाद प्रसन्न मुद्रा में

    साधारण मनुष्य विषय भोग का संस्कार लेकर आते हैं और बचपन से ही उधर लगते हैं। बसंत पंचमी में साल में एक बार हल की पूजा होती है । राजा लोग भी हल पकड़ लिया करते थे। सीता जी हल की पूजा के दिन ही निकली थी । जबकि जनक जी हल जोत रहे थे। इसीलिए श्री जानकी जी को भूमिजा भी कहते हैं। जनक जी के हल की नोक लगने से घड़े से सीता जी निकली थी। ढाई हजार वर्ष से कुछ पहले भगवान बुद्ध का जन्म हुआ । राजा शुद्धोदन हल जोतने गए थे। उस दिन बड़ा उत्सव हुआ था। भगवान बुद्ध को भी लेकर दाई वहां गयी। दायरे में से बाहर निकली और फिर भीतर गयी। तो भगवान बुद्ध को ध्यान अवस्थित उसने देखा और लोगों को भी दिखाया। ऐसा क्यों हुआ । बहुत से जन्मों से वह ध्यान करते चले आते थे।

SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। दैनिक चर्या करते गुरुदेव व सेवक
दैनिक चर्या करते गुरुदेव व सेवक

      हम साधारण मनुष्य विषय भोग का संस्कार लेकर आते हैं । इसलिए उस ओर बचपन से ही जाते हैं। कितने कुछ ज्ञान चिंतन और कुछ विषय चिंतन करते हैं। कितने बिल्कुल विषय चिंता नहीं करते हैं। कितने में ज्ञान चिंतन की मात्रा अधिक है और विषय चिंतन की मात्रा कम रहती है । अनेक जन्मों से लेकर आज भी हम सुख की ओर दौड़ते हैं । कितने विषय सुख की ओर से धक्का खाकर फिर उसी ओर जाते हैं। कितने उस सुख की ओर से धोखा खाकर ज्ञान की ओर जाते हैं। विषय सुख की ओर से उनकी आसक्ती हटती है।

     आज के और पहले के संतों के ज्ञान से जानने में आता है कि विषय में सुख नहीं है । विषय 5 हैं-  रूप, रस, गंध, स्पर्श और शब्द इन पांचों से फाजिल को कोई जानता नहीं है। इन से अधिक संसार में कुछ है ही नहीं ।इन विषयों में दौड़ते-दौड़ते थकते हैं, दुख पाते हैं। फिर भी उधर ही दौड़ते हैं। साधु संत कहते हैं और जिन्होंने अच्छा भजन किया है। वह भी कहते हैं कि बाहर विषय सुख में मत दौड़ो। यहां कहां सुख है? सुख तुम्हारे अंदर है । उस ओर जाओ। विषय सुख भोगते हुए मन संतुष्ट नहीं होता । अधिक चंचल होता है और इसी में दुख होता है । मन बाहर बाहर दौड़ता है तो अंदर प्रविष्ट नहीं होता है । संतों ने बताया कि बाहर विषयों से संतुष्ट तुम नहीं होगे । इससे संतोष करो।


     सुख अंदर में है, उधर चलो । तंद्रा में अंदर में रहते हो तब कोई बाहर का विषय नहीं रहता। फिर भी तुम सुखी रहते हो । चैन मालूम होता है । तंद्रा से कोई छूटता है, तो उस को दुख लगता है। चैन तुम्हारे अंदर है । मुख में मिश्री का टुकड़ा रहे और सो जाओ, तो उसकी मिठास तुमको मालूम नहीं होती। यदि स्वप्न में देखो कि नीम का पत्ता खा रहा हूं। तो नीम का स्वाद कड़वा मालूम पड़ेगा । मिश्री की मिठास का स्वाद नहीं । चेतन भीतर में था इसलिए भीतर का ज्ञान होता था। बाहर का नहीं, अंदर में सुख है, इसलिए अंदर में चलो।


     अंदर में कहां तक जा सकते हो । संतो ने और साधकों ने कहा कि अंदर चला जाता है। जब तुम स्वप्न, सुषुप्ति और जागृत में नहीं रहते। तब तुरिया अवस्था में चलते हुए, अंदर का सुख पा सकते हो ।जैसे जैसे आगे बढ़ो, वैसे-वैसे अधिक सुख मिलता जाएगा। जहां चौथी अवस्था समाप्त हो जाएगी ।वहां चलना भी समाप्त हो जाएगा।"

     हम आशा करते हैं कि ध्यान योग में सफलता पाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ज्ञान आप लोगों को हो गया होगा। हमारे अगले पोस्ट में जानेंगे "कर्म-सिद्धांत का  परिचय" उसे पढ़ना ना भूलें । तब तक के लिए जय गुरु महाराज।

SD07, ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। SD07,  ध्यान योग में सफलता के लिए जरूरी बातें। --महर्षि मेंहीं। Reviewed by सत्संग ध्यान on 1/16/2020 Rating: 5

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