Ad1

Ad2

परिचय06, मनुष्य जीवन का परम प्राप्तव्य या लक्ष्य क्या है? क्या वह लक्ष्य ईश्वर है ?

हमारा लक्ष्य है ईश्वर प्राप्ति

 प्रभु प्रेमियों !  पिछले पांच पोस्टों में हम लोग जान चुके हैं कि मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य है ईश्वर को प्राप्त करके परम सुखी हो जाना। इसके लिए संत सद्गुरु से ईश्वर भक्ति की युक्ति जाननी चाहिए।
इस पोस्ट में जानेंगे कि सद्गुरु कैसे शिष्यों को भक्ति करने के योग बनाते हैं? भक्ति समर्पण, bhakti yog ke prakar, गीता में भक्ति, भक्ति योग में गुरु की आवश्यकता, कर्मयोग ज्ञानयोग भक्ति योग, नारद भक्ति सूत्र में योग, गीता में ज्ञान मार्ग, raj yoga in hindi, ज्ञान योग, योग साधना के प्रकार, गीता में नवधा भक्ति, योग का स्वरूप आदि बातों के बारे में।

पिछले पोस्ट में संत सद्गुरु के बारे में बहुत बातें बताए गए हैं उसे पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

मनुष्य जीवन का परम प्राप्तव्य या  लक्ष्य क्या है? इस संबंध में चर्चा करते सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज
गुरु और शिष्य का संबंध और ध्यान योग

मनुष्य जीवन परम लक्ष्य है ईश्वर प्राप्ति।

     प्रभु प्रेमियों, "यहां सब कोई मुसाफिर हैं, फिर भी कहते हैं कि यह मेरा घर है। किसी को यह यकीन नहीं है कि हम यहां सदा नहीं रहेगें। संत कबीर साहब कहते हैं- 'माल मुलुक को कौन चलावे, संग न जात शरीर।' हम किधर जाएंगे मालूम नहीं है । संत कबीर साहब को बड़ी चिंता हो रही है कि संसार से जाना जरूर है ।बहुत अंदेशे की बात है, लोग अपना मार्ग नहीं जानते हैं कि कहां जाएंगे, यह संसार अज्ञानता का शहर है। " -सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के उपर्युक्त युक्ति  9 अक्टूबर 1949 ई. के अपराह्नकालीन सत्संग, मुरादाबाद सत्संग मंदिर का है। संत कबीर साहब का भजन है 'मोरे जियरा बड़ा अंदेशवा, मुसाफिर जैहो कौनी ओर।' यह बहुत बड़ा पद्य है । उसी की व्याख्या करते हुए गुरु महाराज ने उपर्युक्त वचन कहे हैं।


मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है । संत कबीर साहब के वचनों में
संत कबीर

     प्रभु प्रेमियों, हम संसार रूपी चौराहे (बहू राहे) पर खड़े हैं । वहां से जिसको जैसा गुरु मिलता है, जैसा साथी मिलता है, जैसा सहारा मिलता है, वह उसके साथ चलता चला जाता है। फिर उसका जो मनुष्य शरीर का मुख्य लक्ष्य है। उसकी उसे जानकारी ही नहीं हो पाती है। अगर सच्चे संत सतगुरु का सहारा मिल जाता है। सत्संग का सहारा मिल जाता है। तब तो मनुष्य शरीर के परम लक्ष्य की तरफ ही वह बढ़ता है।  संतो के वचनों के अनुसार या सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के वचनों के अनुसार अगर आपको समझना है। तो आप उनके प्रवचन को सुनें, जो मैं नीचे उद्धृत कर रहा हूं । 

मनुष्य जीवन का लक्ष्य पर  सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज का प्रवचन
संतवाणी का मर्म

मनुष्य जीवन का परम प्राप्तव्य या  लक्ष्य क्या है? प्रवचन का शेष भाग।
गुरुदेव के वचन

मनुष्य जीवन का लक्ष्य या परम प्राप्तव्य है ईश्वर । सद्गुरु महर्षि मेंही व संतसेवी जी
सद्गुरु महर्षि मेंही व संतसेवी जी

प्रभु प्रेमियों ! हम आशा करते हैं उपर्युक्त प्रवचन का पाठ करके आप समझ गए होंगे कि सद्गुरु कैसे शिष्यों को भक्ति करने के योग बनाते हैं? भक्ति समर्पण, bhakti yog ke prakar, गीता में भक्ति, भक्ति योग में गुरु की आवश्यकता । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। तब तक के लिए जय गुरु महाराज  !  !

अधिक जानकारी के लिए हम दूसरे पोस्ट में और बातें बताएगे। हमारा अगला  पोस्ट पढ़ने के लिए    यहां दवाएं।

परिचय06, मनुष्य जीवन का परम प्राप्तव्य या लक्ष्य क्या है? क्या वह लक्ष्य ईश्वर है ? परिचय06, मनुष्य जीवन का परम प्राप्तव्य या  लक्ष्य क्या है? क्या वह लक्ष्य ईश्वर है ? Reviewed by सत्संग ध्यान on 1/16/2020 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

कृपया वही लोग टिप्पणी करें जिन्हे कुछ जानने की इच्छा हो । क्योंकि यहां मोक्ष पर्यंत ध्यानाभ्यास का कार्यक्रम चलता है। उससे जो अनुभव होता है, उन्हीं चीजों को आप लोगों को शेयर किया जाता है ।फालतू सवाल के जवाब में समय बर्बाद होगा। इसका ध्यान रखें।

टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.

https://

सत्संग ध्यान ब्लॉग अथवा किसी भी ब्लॉग की सदस्यता लेने का तरीका

सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बनना      प्रभु प्रेमियों! सत्संग ध्यान के क्रमानुसार परिचय में आपका स्वागत है । आज हम सीखेंगे- सत्संग ध्यान...

Ads 5

Blogger द्वारा संचालित.