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परिचय 02, Why do satsang meditate ।। मनुष्य जीवन में सत्संग ध्यान की आवश्यकता

सत्संग ध्यान क्यों करें?

       प्रभु  प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के परिचय वाला पोस्ट (परिचय01,)    में हमलोगों ने जाना कि सत्संग ध्यान क्या है? इस पोस्ट मेंं जानेंगेे-  मनुष्य जीवन में सत्संग ध्यान की क्या उपयोगिता  है ? योग का मानव जीवन में महत्व, Avashyakta, योग शिक्षा की आवश्यकता, उपयोगिता एवं अनिवार्यता। योग की जरूरत, उपयोग, शारीरिक महत्व एवं अन्य विशेषताओं के बारे में ।

मनुष्य जीवन में सत्संग ध्यान की आवश्यकता को दर्शाने वाला चित्र।
मेडिटेशन परिचय चित्र

मनुष्य का प्राप्तव्य क्या है?

     मनुष्य शरीर के बारे में सभी संतों, महात्माओं ने कहा है कि- अगर इस जन्म में ईश्वर को नहीं प्राप्त किया या ईश्वर के बारे में नहीं जाना तो बहुत बड़ी हानि है। इसलिए मनुष्य का सबसे बड़ा प्राप्तव्य ईश्वर है। कम-से-कम वह बुद्धि से भी ईश्वर कैसा है? उसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं ? इत्यादि बातों को जान ले तो बहुत अच्छा है।  सामवेद के केनोपनिषद खंड-२ का पांचवां मंत्र है--
"इस चेदवेदीदथ सत्यममस्ति न चेदिहावेदीन्महती विनष्टि:।
भूतेषु भूतेषु विचित्य धीरा प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति।।५।।"
     गीता प्रेस गोरखपुर, भाषा अ०--  यदि इस जन्म में ब्रह्म को जान लिया तब तो ठीक है और यदि उसे इस जन्म में न जाना तब तो बड़ी भारी हानि है । बुद्धिमान लोग उसे समस्त प्राणियों में उपलब्ध करके इस लोक से जाकर (मरकर) अमर हो जाते हैं।।५।।


मनुष्य जीवन की सार्थकता। पिंड माहीं ब्रह्मांड का चित्र।
पिंड माहीं ब्रह्मांड का चित्र
पिंड माही ब्रह्मांड
     सत्संग ध्यान को क्रमानुसार या स्टेप बाय स्टेप समझने के लिए उपर में जो नक्शा है- "पिंड माहिं ब्राह्मण" का इसमें सारा बात लिखा हुआ है, संक्षेप में। इसको आप कोड बर्ड भी कह सकते हैं। इस को समझने के लिए बहुत दिनों तक सत्संग करना पड़ेगा।
 इस चित्र को समझाने के लिए पूज्यपाद स्वामी लाल दास जी महाराज ने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है- "पिंड माहिं ब्रह्मांड" उसका अध्ययन करें।

आवागमन के चक्र को समझें-

आवागमन के चक्र को समझने के लिए उपर्युक्त चित्र को देखें, जो तीन भागों में विभक्त किया गया है।
 पहला परमात्मा , दूसरा- रास्ता और तीसरा- हमलोग ।
 हम लोग अभी जहां रहते हैं, वह पृथ्वी पर या संसार में अंधकार का क्षेत्र है। 'जोई पिंड सोई ब्रह्मांडा' उपर्युक्त नक्शा को देखने पर यह बात स्पष्ट हो जाती है ‌। मनुष्य शरीर में साधारण तरीके से जागृत अवस्था में जीव का वासा नेत्र में होता है। 'नेत्रस्थं जागृतं स्वप्नं कंठं समा विषेत।' इस अंधकार में रहने के कारण ही आवागमन का चक्र होता रहता है और जीव तरह-तरह के योनियों में जाकर तरह-तरह के दुखों का भोग करता है इससे छूट जाने के लिए ही ईश्वर भक्ति या ईश्वर प्राप्ति की आवश्यकता है।
     हमलोग आंख बंद करते हैं तो अंधकार दिखाई पड़ता है। इसी अंधकार में जीव रहता है। इस कारण से उसे असली परमात्मा का ज्ञान नहीं होता है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए जीव को ध्यान योग का सहारा लेकर परमात्मा तक जाया जाता है। ईश्वर तक जाने में प्रकाश और शब्द मिलते हैं। जिसका चर्चा उपर्युक्त चित्र में किया गया है।
     मनुष्य शरीर का सबसे बड़ा लाभ उठाना यही है कि हम परमात्मा को प्राप्त कर लें , क्योंकि दूसरे शरीरों से परमात्मा को नहीं प्राप्त किया जा सकता है। परमात्मा या ईश्वर की प्राप्ति हो जाने पर लोग ईश्वर जैसा शक्तिशाली हो जाता है । वह सभी कामनाओं को पूरा करने में समर्थ होता है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज लिखते हैं "जानत तुम्हहि, तुम ही हो जाई ।" परमात्मा को जान लेने पर परमात्मा के जैसा ही हो जाता है। परमात्मा कौन है? वे कहां मिलेंगे? उसका स्वरुप कैसा है? ईश्वर से संबंधित जो बातें हम को जानना चाहिए, उसको हम ईश्वर-परमात्मा नामक पेज में जानेंगे।

योग की आवश्यकता?

     आवागमन से छूटने के लिए योग की आवश्यकता है। क्योंकि योग के सहारे ही ईश्वर तक जाया जा सकता है। योग को ही ध्यान एवं योगाभ्यास आदि कहते हैं। इस योग को करना क्यों जरूरी है वह गुरु महाराज अपने इस भजन में बड़े ही स्पष्ट शब्दों में बताते हैं भजन नंबर P108। परमात्मा जैसा बनने के लिए हमें क्या करना होगा?  इसकी जो युक्ति या साधन है, उसे जानने के लिए गुरु की आवश्यकता है। ध्यान-योग कैसे किया जाता है इसकी चर्चा- वेद-उपनिषद, गीता, रामायण एवं सभी पहुंचे हुए संतों की वाणीयों में है । उसके अनुसार चलना ही परमात्मा प्राप्ति का साधन है; रास्ता है । उस रास्ता का वर्णन 'ध्यान' नामक अध्याय या पेज में करेंगे।

     हम लोग अभी जिस स्थिति में हैं । उसी स्थिति में रहते हुए, उस परमात्मा को कैसे प्राप्त कर सकते हैं? इसका जो उपाय संत लोगों ने धर्म ग्रंथों में बताया है, उस विषय का जो चर्चा होगा! उसको हम लोग 'आध्यात्मिक विचार' नामक अध्याय या पेज मैं जानेंगे ।



प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के विचारों से आप ने जाना कि योग का मानव जीवन में महत्व, Avashyakta, योग शिक्षा की आवश्यकता, उपयोगिता एवं अनिवार्यता। योग की जरूरत, उपयोग इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।  सत्संग ध्यान YouTube चैनल का एक वीडियो यहां दिया जा रहा है नमुना के लिए। जय गुरु महाराज।

इस पोस्ट के  बाद वाले पोस्ट में जानेंगे कि ईश्वर का स्वरूप कैसा है? पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

परिचय 02, Why do satsang meditate ।। मनुष्य जीवन में सत्संग ध्यान की आवश्यकता परिचय 02, Why do satsang meditate ।। मनुष्य जीवन में सत्संग ध्यान की आवश्यकता Reviewed by सत्संग ध्यान on 1/15/2020 Rating: 5

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