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SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ? एक परिचय। --Sadguru Maharishi mehi.

 सत्संग और ध्यान क्या है ?

प्रभु प्रेमियों ! आइये आप का स्वागत है । हमारे सत्संग ध्यान के क्रमानुसार परिचय में। अगर आप सत्संग ध्यान को स्टेप बाय स्टेप समझना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर आए हैं। आइए हम आपको सबसे पहले सत्संग के बारे में बताएं। 
    प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के शब्दों में अगर मैं आपको बताऊं, तो वे कहते हैं- 'नित्य सत्संगति करो बनाई, अंतर बाहर द्वै विधि भाई। धर्म कथा बाहर सत्संगा, अंतर सत्संग ध्यान अभंगा।'  -महर्षि मेंही पदावली ।

SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ?  एक परिचय।  --Sadguru Maharishi mehi.सत्संग चर्चा में संलग्न गुरुदेव
सत्संग चर्चा में संलग्न गुरुदेव

सद्गुरु महर्षि मेंहीं के शब्दों में सत्संग ध्यान

प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने 13 अक्टूबर 1949 ईस्वी को कहने की कृपा की थी कि "सत्य के संग को सत्संग कहते हैं। सत्य तीनों काल में अबाधित है। अपरोक्ष रूप से सत्य को सत्य ही जान सकता है। वह सत्य क्या है ?चेतन रूप सत्य है। इसमें परिवर्तन नहीं होता है। भिन्न भिन्न शरीरों में बटा हुआ व्यष्टि रूप है। घट-घट वासी चैतन्य व्यष्टि रूप में है। समष्टि सत् स्वरूप है। उस सत् में इस सत् का मिलाप होना ही सत्संग है। यह आंतरिक सत्संग है । वचन रूप में यह वाह्य सत्संग है"। -पूरा प्रवचन सुनने के लिए  यहां दवाएं।

सत्संग की बातों को स्पष्ट करते हुए गुरुदेव दिनांक 28 दो 1954 ई. को कहने की कृपा किए :--
"सत्संग में बहुत तरह की बातें होती है। ऐसा नहीं कि जो आध्यात्मिकता के खिलाफ बातें हैं, वे भी होती हैं । मैं आपका ख्याल उधर ले जाना चाहता हूं, जो आपने पहले सद् ग्रंथों के पाठ में सुना था। मेरा यह कायदा और सहारा भी है कि संतों की बाणी का में आदर करुं और उस के सहारे चलू। संतों की बाणी को ही मैं सत्संग कहूंगा। जो मुझे जानते हैं, वे तो वैसे ही मुझे कहते होंगे कि संतों की वाणी का सहारा मुझे उतना ही है। जितना कि बिना वायु के कोई सांस नहीं ले सकता।"   पूरा प्रवचन सुनने के लिए यहां दवाएं।

SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ?  एक परिचय।  --Sadguru Maharishi mehi. सत्संग प्रचार में सतत् लीन
सत्संग प्रचार में सतत् लीन

 सत्संग का बाह्य स्वरूप

 प्रभु प्रेमियों !  बाह्य रूप में अभी जो हम लोग सत्संग के बारे में सुन रहे हैं, पढ़ रहे हैं तो इस तरह की जो चर्चा होती है, इसको बाह्य सत्संग कहते हैं। या बाहरी सत्संग कहते हैं। दरअसल सत्संग में ईश्वर से संबंधित बातों की चर्चा होती है- जैसे ईश्वर कौन है? कैसे हैं ? उसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? उसका सही स्वरूप क्या है? ईश्वर को क्यों प्राप्त करें? ईश्वर प्राप्त करने सेे क्या लाभ होगा? ईश्व्वर की प्राप्ति ध्यान से ही संबंधित है।  गुरु, कर्म, आदि बातों के साथ इस लोक में कैसे रहे! जिससे कि हम इस लोक (अर्थात हम जहां रह रहे हैं): वहां भी सुख से रहें और यहां से जाने के बाद अर्थात मरने के बाद भी सुखी रह सके। इन सब बातों पर चर्चा होती है । जो बाहरी सत्संग कहलाता है।

SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ?  एक परिचय।  --Sadguru Maharishi mehi. कुप्पाघाट के चबूतरा पर गुरुदेव
कुप्पाघाट के चबूतरा पर गुरुदेव


सत्संग का आंतरिक स्वरूप ध्यान है।

     आंतरि सत्संग उसको कहते हैं जिसमें उपर्युक्त बातों (बाहरी सत्संग) को अच्छी तरह समझ कर, उसके अनुसार व्यवस्था करके, उसकी प्राप्ति का जो उपाय करते हैं उसे आंतरिक सत्संग या ध्यान कहते हैं। ध्यान-भजन करने लगे, परमात्मा प्राप्ति का साधन करने लगे, तो वह अंतरि सत्संग कहलाता है। आंतरिक सत्संग कुछ काल तक होने लग जाए, तो असल में उसे ही ध्यान कहा जाता है।

SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ?  एक परिचय।  --Sadguru Maharishi mehi. ध्यानावस्था में गुरुदेव
ध्यानावस्था में गुरुदेव
  
इसी को आध्यात्मिक भाषा में 'योग करना', 'ध्यान' करना, मेडिटेशन करना, योगाभ्यास, आदि विभिन्न नामों से संतो ने, ऋषियों ने कहा है।

    प्रभु प्रेमियों ! सत्संग और ध्यान हम लोग क्यों करते हैं ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए आप जाने कि हमारी मंजिल क्या है? हम चाहते क्या हैं ? हमारा जीने का उद्देश्य क्या है?  जो लोग सत्संग करते है, तो उन्हें पता चलता है कि हमारी मंजिल है- परमात्मा को प्राप्त करना। परमात्मा को प्राप्त करने के लिए जरुरी है- गुरू का मार्गदर्शन। गुरु किसे बनाया जाय? तो इसके लिए लगातार सत्संग । सत्संग में जानेंगे कि गुरु कौन हो सकता है? तो आइये गुरु महाराज का सत्संग सुने। 



     सत्संग में संत महात्मा लोग अध्यात्म विषय पर, ईश्वर, परमात्मा, गुरु, ध्यान, सत्संग आदि क्या है? इसे कैसे करना चाहिए? इसको करने से क्या फायदा है? हम अपनी मंजिल परमात्मा को कब तक पा सकते हैं ? इत्यादि के बारे में बताते हैं। 
     प्रभु प्रेमियों! सत्संग और ध्यान के विविध प्रसंग या बातों को विस्तार से जानकारी के लिए आप नीचे गुरु महाराज के प्रवचनों के बारे में जानकारी  दिया गया है। आप वहां जाएं और सत्संग ध्यान के विभिन्न विषयों पर दिए गए प्रवचनों को अच्छी तरह से पढ़े और समझे।

      सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के अधिक प्रवचन सुनने के लिए हमारा "सत्संग ध्यान" YouTube चैनल सब्सक्राइब कर ले। वहां पर गुरु महाराज के बहुत सारे प्रवचन उपलब्ध हैं। जिसको आप सुन भी सकते हैं और पढ़ भी सकते हैं। अथवा हमारा "सत्संग ध्यान ब्लॉग" उपर्युक्त चित्रों के जैसा प्रवचन पढ़ने के   लिए लिंक पर दवाए या जाएं। वहां गुरु महाराज के बहुत सारे प्रवचन विभिन्न विषयों पर उपलब्ध हैं । उसे पढ़े और समझे। जय गुरु

SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ?  एक परिचय।  --Sadguru Maharishi mehi. सत्संग सुनते जनता
सत्संग सुनते जनता

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान का संक्षिप्त परिचय इस लेख में दिया गया है अगर आप सत्संग के बारे में और अच्छी तरह से समझना चाहते हैं तो हमारा दूसरा पोस्ट पढ़ना ना भूले। इसके लिए इस ब्लॉग का सदस्य बने जाए। जिससे आने वाले पोस्टों की निशुल्क सूचना आपको मिलती रहे और आप उससे लाभ उठा सकें। इस बात को आप अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ ले सके। अगर किसी प्रकार का प्रश्न है तो कमेंट करके अवश्य पूछें।

इस पोस्ट के  बाद वाले पोस्ट में बताया जाएगा कि सत्संग ध्यान का मनुष्य के जीवन में क्या उपयोगिता है? उस पोस्ट को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ? एक परिचय। --Sadguru Maharishi mehi. SD01, सत्संग और ध्यान क्या है ?  एक परिचय।  --Sadguru Maharishi mehi. Reviewed by सत्संग ध्यान on 10/06/2017 Rating: 5

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